Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.141.1-3: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! अपने पुत्र के ये वचन सुनकर और कणिक के उन वचनों का स्मरण करके बुद्धिमान राजा धृतराष्ट्र का मन सब प्रकार से दुविधा में पड़ गया। वे शोक से आकुल हो गए। दुर्योधन, कर्ण, सुबलपुत्र शकुनि और चतुर्थ दु:शासन, ये सब एक साथ बैठकर विचार करने लगे; तब राजा दुर्योधन ने धृतराष्ट्र से कहा -॥1-3॥ | mahabharat अध्याय 1.141: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे पाण्डवोंको वारणावत भेज देनेका प्रस्ताव । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवं श्रुत्वा तु पुत्रस्य प्रज्ञाचक्षुर्नराधिप:।
कणिकस्य च वाक्यानि तानि श्रुत्वा स सर्वश:॥ १॥
धृतराष्ट्रो द्विधाचित्त: शोकार्त: समपद्यत।
दुर्योधनश्च कर्णश्च शकुनि: सौबलस्तथा॥ २॥
दु:शासनचतुर्थास्ते मन्त्रयामासुरेकत:।
ततो दुर्योधनो राजा धृतराष्ट्रमभाषत॥ ३॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! अपने पुत्र के ये वचन सुनकर और कणिक के उन वचनों का स्मरण करके बुद्धिमान राजा धृतराष्ट्र का मन सब प्रकार से दुविधा में पड़ गया। वे शोक से आकुल हो गए। दुर्योधन, कर्ण, सुबलपुत्र शकुनि और चतुर्थ दु:शासन, ये सब एक साथ बैठकर विचार करने लगे; तब राजा दुर्योधन ने धृतराष्ट्र से कहा -॥1-3॥
Vaishampayana says - O King! Hearing these words of his son and remembering those words of Kanik, the mind of the wise King Dhritarashtra was in a dilemma in every way. He was overwhelmed with grief. Duryodhan, Karna, Subal's son Shakuni and the fourth Dushasan all sat together and discussed; then King Duryodhan said to Dhritarashtra -॥1-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥