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mahabharat 1.140.4: विदुरजी ने अपने मन में जानने योग्य सभी बातें सीख ली थीं। वे सदैव पांडवों के कल्याण में लगे रहते थे। इसलिए भोले विदुर ने निश्चय किया कि कुंती अपने पुत्रों के साथ यहाँ से भाग जाए।   |   mahabharat अध्याय 1.140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.140.4 
ततो विदितवेद्यात्मा पाण्डवानां हिते रत:।
पलायने मतिं चक्रे कुन्त्या: पुत्रै: सहानघ:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
विदुरजी ने अपने मन में जानने योग्य सभी बातें सीख ली थीं। वे सदैव पांडवों के कल्याण में लगे रहते थे। इसलिए भोले विदुर ने निश्चय किया कि कुंती अपने पुत्रों के साथ यहाँ से भाग जाए।
 
Viduraji had learned all the things worth knowing in his mind. He was always engaged in the welfare of the Pandavas. Therefore, the innocent Vidura decided that Kunti should run away from here with her sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)