श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.140.37 
सततं निरयं प्राप्ता: परपिण्डोपजीविन:।
न भवेम यथा राजंस्तथा नीतिर्विधीयताम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! ऐसी नीति अपनाइए कि हमें दूसरों के दिए हुए अन्न पर निर्वाह करके सदा नरक का दुःख न भोगना पड़े॥37॥
 
O King! Please adopt such a policy that we do not have to live on the food given by others and suffer the pain of hell forever. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)