vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता
»
श्लोक 37
श्लोक
1.140.37
सततं निरयं प्राप्ता: परपिण्डोपजीविन:।
न भवेम यथा राजंस्तथा नीतिर्विधीयताम्॥ ३७॥
अनुवाद
हे राजन! ऐसी नीति अपनाइए कि हमें दूसरों के दिए हुए अन्न पर निर्वाह करके सदा नरक का दुःख न भोगना पड़े॥37॥
O King! Please adopt such a policy that we do not have to live on the food given by others and suffer the pain of hell forever. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×