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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.140.33 
मतमेतच्च भीष्मस्य न स राज्यं बुभुक्षति।
अस्माकं तु परां पीडां चिकीर्षन्ति पुरे जना:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी इसे स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि वे स्वयं राज्य भोगना नहीं चाहते। परन्तु नगर के लोग हमारे लिए कोई बड़ा उपद्रव खड़ा करना चाहते हैं।
 
Bhishmaji will accept this because he himself does not want to enjoy the kingdom. But the people of the city want to arrange a great trouble for us. 33.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)