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mahabharat 1.140.19: वैशम्पायन बोले, "हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले राजन! मैं तुम्हें लाक्षागृह के जलने और पाण्डवों के वहाँ से निकल भागने का वृत्तान्त विस्तारपूर्वक सुनाता हूँ। सुनो।"   |   mahabharat अध्याय 1.140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.140.19 
वैशम्पायन उवाच
शृणु विस्तरशो राजन् वदतो मे परंतप।
दाहं जतुगृहस्यैतत् पाण्डवानां च मोक्षणम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, "हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले राजन! मैं तुम्हें लाक्षागृह के जलने और पाण्डवों के वहाँ से निकल भागने का वृत्तान्त विस्तारपूर्वक सुनाता हूँ। सुनो।"
 
Vaishmpayana said, "O King who torments his enemies! I am telling you in detail the story of the burning of the house of Laksha and the escape of the Pandavas from it. Listen."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)