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mahabharat 1.140.14-15: और उसने किसी को भेजकर राजा धृतराष्ट्र के पास यह समाचार सुनाकर कहा - 'कुरुनन्दन! तुम्हारी महान् इच्छा पूरी हो गई। तुमने पाण्डवों को जला दिया। अब तुम धन्य हो जाओ और अपने पुत्रों के साथ राज्य का आनन्द लो।' यह सुनकर पुत्रों सहित धृतराष्ट्र शोक से व्याकुल हो गए॥14-15॥   |   mahabharat अध्याय 1.140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  1.140.14-15 
राज्ञे च प्रेषयामासुर्यथावृत्तं निवेदितुम्।
संवृत्तस्ते महान् काम: पाण्डवान् दग्धवानसि॥ १४॥
सकामो भव कौरव्य भुङ्क्ष्व राज्यं सपुत्रक:।
तच्छ्रुत्वा धृतराष्ट्रस्तु सह पुत्रेण शोचयन्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
और उसने किसी को भेजकर राजा धृतराष्ट्र के पास यह समाचार सुनाकर कहा - 'कुरुनन्दन! तुम्हारी महान् इच्छा पूरी हो गई। तुमने पाण्डवों को जला दिया। अब तुम धन्य हो जाओ और अपने पुत्रों के साथ राज्य का आनन्द लो।' यह सुनकर पुत्रों सहित धृतराष्ट्र शोक से व्याकुल हो गए॥14-15॥
 
And he sent someone to tell the exact news to King Dhritarashtra and said - 'Kurunandan! Your great wish has been fulfilled. You burnt the Pandavas. Now you become blessed and enjoy the kingdom with your sons.' Hearing this, Dhritarashtra along with his sons became grief-stricken. 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)