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mahabharat 1.14.4: उस महात्मा जरात्कार का मन इस बात पर स्थिर हो गया कि यदि मेरे नाम के समान नाम वाली कोई कन्या मिल जाए तो मैं उसे अपनी पत्नी रूप में स्वीकार कर लूँगा ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.14: जरत्कारुद्वारा वासुकिकी बहिनका पाणिग्रहण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 14: जरत्कारुद्वारा वासुकिकी बहिनका पाणिग्रहण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.14.4 
सनाम्नीं चोद्यतां भार्यां गृह्णीयामिति तस्य हि।
मनो निविष्टमभवज्जरत्कारोर्महात्मन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस महात्मा जरात्कार का मन इस बात पर स्थिर हो गया कि यदि मेरे नाम के समान नाम वाली कोई कन्या मिल जाए तो मैं उसे अपनी पत्नी रूप में स्वीकार कर लूँगा ॥4॥
 
The mind of that great soul Jaratkar was fixed on the fact that if a girl with the same name as mine is available, then I would accept her as my wife. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)