Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.139.87: जो मनुष्य छोटी सी अग्नि के समान अपने को (धीरे-धीरे सहायक पदार्थों की सहायता से) प्रज्वलित और समृद्ध करता रहता है, वह एक दिन बहुत बड़ा हो जाता है और शत्रुरूपी बहुत बड़ी मात्रा में ईंधन को भी भस्म कर देता है ॥87॥ | mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्निं स्तोकमिवात्मानं संधुक्षयति यो नर:।
स वर्धमानो ग्रसते महान्तमपि संचयम्॥ ८७॥
अनुवाद
जो मनुष्य छोटी सी अग्नि के समान अपने को (धीरे-धीरे सहायक पदार्थों की सहायता से) प्रज्वलित और समृद्ध करता रहता है, वह एक दिन बहुत बड़ा हो जाता है और शत्रुरूपी बहुत बड़ी मात्रा में ईंधन को भी भस्म कर देता है ॥87॥
A man who, like a small fire, keeps on igniting and enriching himself (slowly with the help of auxiliary materials), one day becomes very big and consumes even a huge amount of fuel in the form of the enemy. ॥ 87॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥