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mahabharat 1.139.86: छोटा-सा शत्रु भी यदि उपेक्षा कर दिया जाए तो ताड़ के वृक्ष की तरह जड़ पकड़ लेता है और घने वन में लगी आग की तरह शीघ्र ही अत्यन्त विनाशकारी हो जाता है ॥ 86॥   |   mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  1.139.86 
तालवत् कुरुते मूलं बाल: शत्रुरुपेक्षित:।
गहनेऽग्निरिवोत्सृष्ट: क्षिप्रं संजायते महान्॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
छोटा-सा शत्रु भी यदि उपेक्षा कर दिया जाए तो ताड़ के वृक्ष की तरह जड़ पकड़ लेता है और घने वन में लगी आग की तरह शीघ्र ही अत्यन्त विनाशकारी हो जाता है ॥ 86॥
 
Even a small enemy, if ignored, takes root like a palm tree and like a fire set in a dense forest, soon becomes extremely destructive. ॥ 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)