Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.139.84: भविष्य में जो भी कार्य करना हो, उस पर बुद्धि से विचार करो और विचार करने के बाद उसके अनुसार व्यवस्था करो। इसी प्रकार जो भी कार्य तुम्हारे सामने हो, उसे बुद्धि से विचार करके ही करो। बुद्धि से निश्चय किए बिना किसी भी कार्य या उद्देश्य का परित्याग मत करो। ॥84॥ | mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनागतं हि बुध्येत यच्च कार्यं पुर: स्थितम्।
न तु बुद्धिक्षयात् किंचिदतिक्रामेत् प्रयोजनम्॥ ८४॥
अनुवाद
भविष्य में जो भी कार्य करना हो, उस पर बुद्धि से विचार करो और विचार करने के बाद उसके अनुसार व्यवस्था करो। इसी प्रकार जो भी कार्य तुम्हारे सामने हो, उसे बुद्धि से विचार करके ही करो। बुद्धि से निश्चय किए बिना किसी भी कार्य या उद्देश्य का परित्याग मत करो। ॥84॥
Whatever work is to be done in the future, think over it with wisdom and after thinking, make arrangements accordingly. Similarly, whatever work is in front of you, do it only after thinking with wisdom. Do not abandon any work or objective without deciding with wisdom. ॥ 84॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥