Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.139.83: जो मनुष्य दण्ड के वशीभूत हुए शत्रु पर दया करता है, वह मृत्यु को उसी प्रकार स्वीकार करता है - जैसे खच्चर अपने गर्भरूपी मृत्यु को धारण करता है ॥ 83॥ | mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दण्डेनोपनतं शत्रुमनुगृह्णाति यो नर:।
स मृत्युमुपगृह्णीयाद् गर्भमश्वतरी यथा॥ ८३॥
अनुवाद
जो मनुष्य दण्ड के वशीभूत हुए शत्रु पर दया करता है, वह मृत्यु को उसी प्रकार स्वीकार करता है - जैसे खच्चर अपने गर्भरूपी मृत्यु को धारण करता है ॥ 83॥
A man who shows mercy to an enemy who has been subdued by punishment, accepts death itself - just like a mule carries death itself in the form of its womb. ॥ 83॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥