दण्डेनोपनतं शत्रुमनुगृह्णाति यो नर:।
स मृत्युमुपगृह्णीयाद् गर्भमश्वतरी यथा॥ ८३॥
अनुवाद
जो मनुष्य दण्ड के वशीभूत हुए शत्रु पर दया करता है, वह मृत्यु को उसी प्रकार स्वीकार करता है - जैसे खच्चर अपने गर्भरूपी मृत्यु को धारण करता है ॥ 83॥
A man who shows mercy to an enemy who has been subdued by punishment, accepts death itself - just like a mule carries death itself in the form of its womb. ॥ 83॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥