श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  1.139.77 
नाच्छित्त्वा परमर्माणि नाकृत्वा कर्म दारुणम्।
नाहत्वा मत्स्यघातीव प्राप्नोति महतीं श्रियम्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
राजा मछुआरों के समान दूसरों के हृदय को छेदे बिना, अत्यन्त क्रूर कर्म किए बिना तथा बहुतों के प्राण लिए बिना महान धन अर्जित नहीं कर सकता ॥ 77॥
 
A king cannot acquire great wealth without piercing the hearts of others like fishermen, without committing extremely cruel acts and without taking the lives of many. ॥ 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)