Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.139.62: जो व्यक्ति विश्वासयोग्य न हो, उस पर कभी विश्वास न करें; किन्तु जो व्यक्ति विश्वासयोग्य हो, उस पर भी अधिक विश्वास नहीं करना चाहिए; क्योंकि अत्यधिक विश्वास से उत्पन्न भय राजा की जड़ ही नष्ट कर देता है। | mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न विश्वसेदविश्वस्ते विश्वस्ते नातिविश्वसेत्।
विश्वासाद् भयमुत्पन्नं मूलान्यपि निकृन्तति॥ ६२॥
अनुवाद
जो व्यक्ति विश्वासयोग्य न हो, उस पर कभी विश्वास न करें; किन्तु जो व्यक्ति विश्वासयोग्य हो, उस पर भी अधिक विश्वास नहीं करना चाहिए; क्योंकि अत्यधिक विश्वास से उत्पन्न भय राजा की जड़ ही नष्ट कर देता है।
Never trust a person who is not trustworthy; but even a person who is trustworthy should not be trusted too much; because the fear generated by excessive trust destroys the very roots of a king. 62.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥