Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.139.50: हे राजन! जो राजा इस प्रकार आचरण करता है, वह सदैव सुखी रहता है और समृद्धि प्राप्त करता है। वह कायर को डराकर परास्त कर सकता है और वीर को हाथ जोड़कर वश में कर सकता है। | mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं समाचरन्नित्यं सुखमेधेत भूपति:।
भयेन भेदयेद् भीरुं शूरमञ्जलिकर्मणा॥ ५०॥
अनुवाद
हे राजन! जो राजा इस प्रकार आचरण करता है, वह सदैव सुखी रहता है और समृद्धि प्राप्त करता है। वह कायर को डराकर परास्त कर सकता है और वीर को हाथ जोड़कर वश में कर सकता है।
O King! A king who behaves in this manner always lives happily and attains prosperity. He can defeat a coward by intimidating him and can subdue a brave man with folded hands.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥