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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.139.49 
कणिक उवाच
एवं तेषु प्रयातेषु जम्बुको हृष्टमानस:।
खादति स्म तदा मांसमेक: सन् मन्त्रनिश्चयात्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
कनिक कहते हैं, "सबके चले जाने के बाद सियार का मन खुशी से भर गया क्योंकि वह अपनी योजना में कामयाब हो गया था। फिर उसने अकेले ही मांस खाया।"
 
Kanik says - After all of them had left, the jackal's heart was filled with joy as he had succeeded in his plan. Then he ate the meat all by himself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)