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mahabharat 1.139.43-45: उसके आते ही सियार बोला, "भेड़िये भाई! आज बाघ तुमसे बहुत नाराज़ है, इसलिए तुम मुसीबत में पड़ गए हो; वह बाघिन के साथ यहाँ आ रहा है। इसलिए जो ठीक समझो, करो।" सियार की यह बात सुनते ही कच्चा मांस खाने वाला भेड़िया दुम दबाकर भाग गया। इतने में नेवला भी आ गया।   |   mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 43-45
 
 
श्लोक  1.139.43-45 
तमागतमिदं वाक्यमब्रवीज्जम्बुकस्तदा।
मृगराजो हि संक्रुद्धो न ते साधु भविष्यति॥ ४३॥
सकलत्रस्त्विहायाति कुरुष्व यदनन्तरम्।
एवं संचोदितस्तेन जम्बुकेन तदा वृक:॥ ४४॥
ततोऽवलुम्पनं कृत्वा प्रयात: पिशिताशन:।
एतस्मिन्नेव काले तु नकुलोऽप्याजगाम ह॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
उसके आते ही सियार बोला, "भेड़िये भाई! आज बाघ तुमसे बहुत नाराज़ है, इसलिए तुम मुसीबत में पड़ गए हो; वह बाघिन के साथ यहाँ आ रहा है। इसलिए जो ठीक समझो, करो।" सियार की यह बात सुनते ही कच्चा मांस खाने वाला भेड़िया दुम दबाकर भाग गया। इतने में नेवला भी आ गया।
 
On his arrival the jackal said, 'Brother wolf! Today the tiger is very angry with you, so you are in trouble; he is coming here with the tigress. So do whatever you think is right.' On hearing this from the jackal, the wolf who eats raw meat ran away with his tail between his legs. In the meantime the mongoose also arrived. 43-45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)