Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.139.37: आज वह मेरे बल का आश्रय लेकर अपनी भूख मिटाएगा। उसने ऐसे गर्व भरे वचन कहे हैं; इसलिए मैं उसके सहयोग से प्राप्त इस भोजन को स्वीकार करना नहीं चाहता ॥37॥ | mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मद्बाहुबलमाश्रित्य तृप्तिमद्य गमिष्यति।
गर्जमानस्य तस्यैवमतो भक्ष्यं न रोचये॥ ३७॥
अनुवाद
आज वह मेरे बल का आश्रय लेकर अपनी भूख मिटाएगा। उसने ऐसे गर्व भरे वचन कहे हैं; इसलिए मैं उसके सहयोग से प्राप्त इस भोजन को स्वीकार करना नहीं चाहता ॥37॥
"Today he will satisfy his hunger by taking recourse to my strength." He has spoken such boastful words; therefore, I do not like to accept this food obtained with his help. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥