श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  1.139.25-26h 
कणिक उवाच
शृणु राजन् यथावृत्तं वने निवसत: पुरा॥ २५॥
जम्बुकस्य महाराज नीतिशास्त्रार्थदर्शिन:।
 
 
अनुवाद
कणिक ने कहा- महाराज! इस विषय में मैं नीति के ज्ञाता एक वनवासी सियार की प्राचीन कथा कहता हूँ, सुनिए।
 
Kanik said- Maharaj! In this regard, I will narrate an ancient story of a forest-dwelling jackal who knows the principles of ethics, listen. 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)