श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  1.139.24-25h 
धृतराष्ट्र उवाच
कथं सान्त्वेन दानेन भेदैर्दण्डेन वा पुन:॥ २४॥
अमित्र: शक्यते हन्तुं तन्मे ब्रूहि यथातथम्।
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - कणिक! कृपया मुझे ठीक-ठीक बताइए कि साम, दान, भेद या दण्ड से शत्रु का नाश किस प्रकार किया जा सकता है ॥24 1/2॥
 
Dhritarashtra asked - Kanik! Please tell me exactly how the enemy can be destroyed by means of Sama, Daan, Bhed or Danda. ॥24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)