श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.139.21 
फलार्थोऽयं समारम्भो लोके पुंसां विपश्चिताम्।
वहेदमित्रं स्कन्धेन यावत् कालस्य पर्यय:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'इस संसार में विद्वानों द्वारा की गई ये सारी व्यवस्थाएँ केवल मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए ही हैं। जब तक समय परिवर्तित होकर हमारे अनुकूल न हो जाए, तब तक यदि हमें अपने शत्रु को भी अपने कंधों पर उठाना पड़े, तो हमें ऐसा करना चाहिए।'
 
‘All these arrangements made by learned men in this world are only for the attainment of desired results. Until the time changes and becomes favourable to us, even if we have to carry our enemy on our shoulders, we should do so.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)