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mahabharat 1.139.18: राजा को चाहिए कि वह शत्रु की गतिविधियों को जानने में सदैव तत्पर रहे। अपने राज्य के सभी अंगों को गुप्त रखे। हे राजन! अपने शत्रुओं की दुर्बलताओं पर सदैव दृष्टि रखे और उनसे सदैव सावधान रहे॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.139.18 
एकाग्र: स्यादविवृतो नित्यं विवरदर्शक:।
राजन् नित्यं सपत्नेषु नित्योद्विग्न: समाचरेत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह शत्रु की गतिविधियों को जानने में सदैव तत्पर रहे। अपने राज्य के सभी अंगों को गुप्त रखे। हे राजन! अपने शत्रुओं की दुर्बलताओं पर सदैव दृष्टि रखे और उनसे सदैव सावधान रहे॥18॥
 
‘The king should always concentrate on knowing the movements of the enemy. Keep all the parts of his kingdom secret. O king! Always keep an eye on the weaknesses of your enemies and always be alert (cautious) of them.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)