Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.138.27: तब धनुष को दृढ़तापूर्वक धारण करने वाले पाण्डवों के महान पराक्रम और पराक्रम को जानकर राजा धृतराष्ट्र का उनके प्रति भाव सहसा दूषित हो गया। अत्यन्त चिन्ता में डूबे रहने के कारण उन्हें रात्रि में नींद नहीं आई॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 1.138: युधिष्ठिरका युवराजपदपर अभिषेक, पाण्डवोंके शौर्य, कीर्ति और बलके विस्तारसे धृतराष्ट्रको चिन्ता । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो बलमतिख्यातं विज्ञाय दृढधन्विनाम्।
दूषित: सहसा भावो धृतराष्ट्रस्य पाण्डुषु।
स चिन्तापरमो राजा न निद्रामलभन्निशि॥ २७॥
अनुवाद
तब धनुष को दृढ़तापूर्वक धारण करने वाले पाण्डवों के महान पराक्रम और पराक्रम को जानकर राजा धृतराष्ट्र का उनके प्रति भाव सहसा दूषित हो गया। अत्यन्त चिन्ता में डूबे रहने के कारण उन्हें रात्रि में नींद नहीं आई॥ 27॥
Then, knowing about the great prowess and valour of the Pandavas who held the bow firmly, King Dhritarashtra's feelings towards them suddenly became tainted. He could not sleep at night due to being immersed in extreme worry.॥ 27॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि धृतराष्ट्रचिन्तायामष्टात्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें धृतराष्ट्रकी चिन्ताविषयक एक सौ अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥