Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.138.26: जनमेजय! इस प्रकार महापुरुष पाण्डवों ने प्राचीन काल में अन्य राष्ट्रों पर विजय प्राप्त करके अपने राष्ट्र का विस्तार किया।   |   mahabharat अध्याय 1.138: युधिष्ठिरका युवराजपदपर अभिषेक, पाण्डवोंके शौर्य, कीर्ति और बलके विस्तारसे धृतराष्ट्रको चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 138: युधिष्ठिरका युवराजपदपर अभिषेक, पाण्डवोंके शौर्य, कीर्ति और बलके विस्तारसे धृतराष्ट्रको चिन्ता  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.138.26 
एवं सर्वे महात्मान: पाण्डवा मनुजोत्तमा:।
परराष्ट्राणि निर्जित्य स्वराष्ट्रं ववृधु: पुरा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! इस प्रकार महापुरुष पाण्डवों ने प्राचीन काल में अन्य राष्ट्रों पर विजय प्राप्त करके अपने राष्ट्र का विस्तार किया।
 
Janamejaya! In this way, the great men of men, the Pandavas, expanded their nation by conquering other nations in ancient times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)