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mahabharat 1.138.17: पाण्डुनन्दन धनंजय गदा, तलवार, रथ और धनुष से युद्धकला में निपुण हो गए ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.138: युधिष्ठिरका युवराजपदपर अभिषेक, पाण्डवोंके शौर्य, कीर्ति और बलके विस्तारसे धृतराष्ट्रको चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 138: युधिष्ठिरका युवराजपदपर अभिषेक, पाण्डवोंके शौर्य, कीर्ति और बलके विस्तारसे धृतराष्ट्रको चिन्ता  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.138.17 
गदायुद्धेऽसियुद्धे च रथयुद्धे च पाण्डव:।
पारगश्च धनुर्युद्धे बभूवाथ धनंजय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन धनंजय गदा, तलवार, रथ और धनुष से युद्धकला में निपुण हो गए ॥17॥
 
Pandunandan Dhananjay became proficient in the art of warfare with mace, sword, chariot and bow. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)