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mahabharat 1.138.15: यह सुनकर कौरवश्रेष्ठ अर्जुन ने 'बहुत अच्छा' कहकर उनकी आज्ञा का पालन करने की प्रतिज्ञा की। उन्होंने अपने गुरु के दोनों चरण पकड़कर उत्तम शिक्षा ग्रहण की।   |   mahabharat अध्याय 1.138: युधिष्ठिरका युवराजपदपर अभिषेक, पाण्डवोंके शौर्य, कीर्ति और बलके विस्तारसे धृतराष्ट्रको चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 138: युधिष्ठिरका युवराजपदपर अभिषेक, पाण्डवोंके शौर्य, कीर्ति और बलके विस्तारसे धृतराष्ट्रको चिन्ता  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.138.15 
तथेति च प्रतिज्ञाय द्रोणाय कुरुपुङ्गव:।
उपसंगृह्य चरणौ स प्रायादुत्तरां दिशम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर कौरवश्रेष्ठ अर्जुन ने 'बहुत अच्छा' कहकर उनकी आज्ञा का पालन करने की प्रतिज्ञा की। उन्होंने अपने गुरु के दोनों चरण पकड़कर उत्तम शिक्षा ग्रहण की।
 
On hearing this, the best of the Kurus, Arjuna, said, 'Very good' and vowed to obey his orders. Holding both the feet of his Guru, he received the best teachings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)