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mahabharat 1.138.14: तब अर्जुन ने प्रतिज्ञा की, ‘मैं अवश्य दूँगा।’ उसके ऐसा कहने पर गुरु द्रोण ने कहा, ‘अबोध अर्जुन! यदि मैं भी युद्धभूमि में तुम्हारे विरुद्ध लड़ने आऊँ, तो तुम्हें (अवश्य) मेरा सामना करना पड़ेगा।’   |   mahabharat अध्याय 1.138: युधिष्ठिरका युवराजपदपर अभिषेक, पाण्डवोंके शौर्य, कीर्ति और बलके विस्तारसे धृतराष्ट्रको चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 138: युधिष्ठिरका युवराजपदपर अभिषेक, पाण्डवोंके शौर्य, कीर्ति और बलके विस्तारसे धृतराष्ट्रको चिन्ता  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.138.14 
ददानीति प्रतिज्ञाते फाल्गुनेनाब्रवीद् गुरु:।
युद्धेऽहं प्रतियोद्धव्यो युध्यमानस्त्वयानघ॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने प्रतिज्ञा की, ‘मैं अवश्य दूँगा।’ उसके ऐसा कहने पर गुरु द्रोण ने कहा, ‘अबोध अर्जुन! यदि मैं भी युद्धभूमि में तुम्हारे विरुद्ध लड़ने आऊँ, तो तुम्हें (अवश्य) मेरा सामना करना पड़ेगा।’
 
Then Arjuna vowed, 'I will certainly give it.' On his saying this, Guru Drona said, 'Innocent Arjuna! If I too come to fight against you in the battlefield, then you must (certainly) face me.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)