Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.137.d6-d7h: महाराज! उस युद्ध में न दिशाएँ दिखाई दे रही थीं, न आकाश, न पृथ्वी, न ही कुछ और। महाबली गाण्डीवधारी अर्जुन ने अपने बाणों से चारों ओर अन्धकार फैला रखा था। | mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(न दिशो नान्तरिक्षं च तदा नैव च मेदिनी।
अदृश्यत महाराज तत्र किंचन संयुगे॥
बाणान्धकारे बलिना कृते गाण्डीवधन्वना।)
अनुवाद
महाराज! उस युद्ध में न दिशाएँ दिखाई दे रही थीं, न आकाश, न पृथ्वी, न ही कुछ और। महाबली गाण्डीवधारी अर्जुन ने अपने बाणों से चारों ओर अन्धकार फैला रखा था।
Maharaj! In that war, neither the directions nor the sky nor the earth nor anything else could be seen. The powerful warrior Gandivadhari Arjun had spread darkness with his arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥