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mahabharat 1.137.9: जनमेजय! उस समय कौरवों के आक्रमण का समाचार सुनकर तथा उनकी विशाल सेना को अपनी आँखों से देखकर पांचाल नरेश द्रुपद अपने भाइयों सहित बड़ी शीघ्रता से महल से बाहर आये।   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.137.9 
तस्मिन् काले तु पाञ्चाल: श्रुत्वा दृष्ट्वा महद् बलम्।
भ्रातृभि: सहितो राजंस्त्वरया निर्ययौ गृहात्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! उस समय कौरवों के आक्रमण का समाचार सुनकर तथा उनकी विशाल सेना को अपनी आँखों से देखकर पांचाल नरेश द्रुपद अपने भाइयों सहित बड़ी शीघ्रता से महल से बाहर आये।
 
Janamejaya! At that time, King Drupada of Panchalas, on hearing of the Kauravas' attack and seeing with his own eyes their huge army, came out of the palace in great haste along with his brothers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)