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mahabharat 1.137.75-76: द्रुपद अपनी क्षात्र सेना से द्रोणाचार्य को पराजित होते न देख सके । ब्राह्मणों के बल के आगे अपने को हीन मानकर वे (द्रोणाचार्य को परास्त करने के लिए) एक शक्तिशाली पुत्र की इच्छा से पृथ्वी पर विचरण करने लगे । इधर द्रोणाचार्य (उत्तर-पांचलवर्ती) ने अहिच्छत्र नामक राज्य पर अधिकार कर लिया । 75-76॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 75-76
 
 
श्लोक  1.137.75-76 
क्षात्रेण च बलेनास्य नापश्यत् स पराजयम्।
हीनं विदित्वा चात्मानं ब्राह्मेण स बलेन तु॥ ७५॥
पुत्रजन्म परीप्सन् वै पृथिवीमन्वसंचरत् ।
अहिच्छत्रं च विषयं द्रोण: समभिपद्यत॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
द्रुपद अपनी क्षात्र सेना से द्रोणाचार्य को पराजित होते न देख सके । ब्राह्मणों के बल के आगे अपने को हीन मानकर वे (द्रोणाचार्य को परास्त करने के लिए) एक शक्तिशाली पुत्र की इच्छा से पृथ्वी पर विचरण करने लगे । इधर द्रोणाचार्य (उत्तर-पांचलवर्ती) ने अहिच्छत्र नामक राज्य पर अधिकार कर लिया । 75-76॥
 
Drupada did not see Dronacharya being defeated by his Kshatra forces. Considering themselves inferior to the strength of Brahmins, they started wandering on earth with the desire to get a powerful son (to defeat Dronacharya). Here Dronacharya (Uttar-Panchalvarti) took control of the kingdom named Ahichchhatra. 75-76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)