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mahabharat 1.137.73-74: तत्पश्चात् राजा द्रुपद ने विनम्र मन से गंगा के तट पर अनेक जनपदों से युक्त मकन्दीपुरी में तथा नगरों में श्रेष्ठ काम्पिल्य नगर में निवास किया और चर्मण्वती नदी के दक्षिण तट पर स्थित पांचालदेश पर शासन करने लगे। इस प्रकार द्रोणाचार्य ने द्रुपद को परास्त करके पुनः उनकी रक्षा की। 73-74॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 73-74
 
 
श्लोक  1.137.73-74 
माकन्दीमथ गङ्गायास्तीरे जनपदायुताम्।
सोऽध्यावसद् दीनमना: काम्पिल्यं च पुरोत्तमम्॥ ७३॥
दक्षिणांश्चापि पञ्चालान् यावच्चर्मण्वती नदी।
द्रोणेन चैवं द्रुपद: परिभूयाथ पालित:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा द्रुपद ने विनम्र मन से गंगा के तट पर अनेक जनपदों से युक्त मकन्दीपुरी में तथा नगरों में श्रेष्ठ काम्पिल्य नगर में निवास किया और चर्मण्वती नदी के दक्षिण तट पर स्थित पांचालदेश पर शासन करने लगे। इस प्रकार द्रोणाचार्य ने द्रुपद को परास्त करके पुनः उनकी रक्षा की। 73-74॥
 
Thereafter, King Drupada, with a humble heart, resided in Makandipuri consisting of many districts on the banks of Ganga and in the city of Kampilya, the best among cities, and started ruling Panchaladesh on the south bank of the Charmanvati river. In this way Dronacharya defeated Drupada and again protected him. 73-74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)