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mahabharat 1.137.71: द्रुपद बोले - हे ब्रह्मन्! आप जैसे महाबली पुरुष में ऐसी उदारता होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। मैं आपसे अत्यंत प्रसन्न हूँ और आपसे चिरस्थायी मैत्री और प्रेम रखना चाहता हूँ ॥ 71॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  1.137.71 
द्रुपद उवाच
अनाश्चर्यमिदं ब्रह्मन् विक्रान्तेषु महात्मसु।
प्रीये त्वयाहं त्वत्तश्च प्रीतिमिच्छामि शाश्वतीम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
द्रुपद बोले - हे ब्रह्मन्! आप जैसे महाबली पुरुष में ऐसी उदारता होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। मैं आपसे अत्यंत प्रसन्न हूँ और आपसे चिरस्थायी मैत्री और प्रेम रखना चाहता हूँ ॥ 71॥
 
Drupada said - O Brahman! It is not surprising that such generosity is found in a mighty soul like you. I am very pleased with you and want to have everlasting friendship and love with you. ॥ 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)