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mahabharat 1.137.69: 'यज्ञसेन! आपने कहा था - जो राजा नहीं है, वह राजा का मित्र नहीं हो सकता; इसीलिए मैंने आपका राज्य लेने का प्रयत्न किया है।   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.137.69 
अराजा किल नो राज्ञ: सखा भवितुमर्हसि।
अत: प्रयतितं राज्ये यज्ञसेन मया तव॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
'यज्ञसेन! आपने कहा था - जो राजा नहीं है, वह राजा का मित्र नहीं हो सकता; इसीलिए मैंने आपका राज्य लेने का प्रयत्न किया है।
 
'Yagyasena! You had said - One who is not a king cannot be a friend of a king; that is why I have tried to take your kingdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)