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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.137.68 
प्रार्थयेयं त्वया सख्यं पुनरेव जनाधिप।
वरं ददामि ते राजन् राज्यस्यार्धमवाप्नुहि॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! मैं आपसे पुनः मित्रता की प्रार्थना करता हूँ। हे राजन! मैं आपको वरदान देता हूँ कि आप इस राज्य का आधा भाग मुझसे ले लें।
 
‘O Lord of men! I once again request you for friendship. O King! I grant you a boon, you take half of this kingdom from me. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)