Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.137.66: यह कहकर द्रोणाचार्य थोड़ा हँसे। फिर वे उनसे इस प्रकार बोले—'वीरों! अपने प्राणों को संकट में जानकर भी भयभीत मत होओ। हम क्षमाशील ब्राह्मण हैं।' | mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमुक्त्वा प्रहस्यैनं किंचित् स पुनरब्रवीत्।
मा भै: प्राणभयाद् वीर क्षमिणो ब्राह्मणा वयम्॥ ६६॥
अनुवाद
यह कहकर द्रोणाचार्य थोड़ा हँसे। फिर वे उनसे इस प्रकार बोले—'वीरों! अपने प्राणों को संकट में जानकर भी भयभीत मत होओ। हम क्षमाशील ब्राह्मण हैं।'
Having said this, Dronacharya laughed a bit. Then he again spoke to them in this manner—'Valiant! Do not be afraid knowing that your life is in danger. We are forgiving Brahmins.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥