Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.137.64: उसका अभिमान चूर हो गया, उसकी सम्पत्ति छीन ली गई और वह पूर्णतया पराधीन हो गया; उस समय द्रोणाचार्य ने मन में पूर्वकाल के वैर का स्मरण करके राजा द्रुपद से कहा-॥64॥ | mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भग्नदर्पं हृतधनं तं तथा वशमागतम्।
स वैरं मनसा ध्यात्वा द्रोणो द्रुपदमब्रवीत्॥ ६४॥
अनुवाद
उसका अभिमान चूर हो गया, उसकी सम्पत्ति छीन ली गई और वह पूर्णतया पराधीन हो गया; उस समय द्रोणाचार्य ने मन में पूर्वकाल के वैर का स्मरण करके राजा द्रुपद से कहा-॥64॥
His pride was shattered, his wealth was snatched away and he was completely subdued; at that time Dronacharya, remembering the past enmity in his mind, said to King Drupada -॥ 64॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥