Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.137.62: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! उस समय अर्जुन के मना करने पर भी महाबली भीमसेन संतुष्ट न होते हुए भी युद्धाभ्यास से निवृत्त हो गए ॥62॥ | mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! उस समय अर्जुन के मना करने पर भी महाबली भीमसेन संतुष्ट न होते हुए भी युद्धाभ्यास से निवृत्त हो गए ॥62॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! At that time, due to Arjun's refusal, the mighty Bhimsen retired from the practice of war even though he was not satisfied. 62॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥