Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.137.52-54: अर्जुन ने सत्यजित् के घोड़े, ध्वज, धनुष, मुट्ठियों, दोनों पार्श्वरक्षकों और सारथि को नष्ट कर दिया। इस प्रकार धनुष के बार-बार टूट जाने और घोड़ों के मारे जाने पर सत्यजित् युद्धभूमि से भाग गया। राजन! उसे युद्ध से विमुख होते देख पांचालराज द्रुपद ने पाण्डुनंदन अर्जुन पर बड़े वेग से बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। तब विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ अर्जुन ने उनके साथ अत्यन्त भीषण युद्ध आरम्भ कर दिया। 52-54॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 52-54
 
 
श्लोक  1.137.52-54 
हयान् ध्वजं धनुर्मुष्टिमुभौ तौ पार्ष्णिसारथी।
स तथा भिद्यमानेषु कार्मुकेषु पुन: पुन:॥ ५२॥
हयेषु विनियुक्तेषु विमुखोऽभवदाहवे।
स सत्यजितमालोक्य तथा विमुखमाहवे॥ ५३॥
वेगेन महता राजन्नभ्यवर्षत पाण्डवम्।
तदा चक्रे महद् युद्धमर्जुनो जयतां वर:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने सत्यजित् के घोड़े, ध्वज, धनुष, मुट्ठियों, दोनों पार्श्वरक्षकों और सारथि को नष्ट कर दिया। इस प्रकार धनुष के बार-बार टूट जाने और घोड़ों के मारे जाने पर सत्यजित् युद्धभूमि से भाग गया। राजन! उसे युद्ध से विमुख होते देख पांचालराज द्रुपद ने पाण्डुनंदन अर्जुन पर बड़े वेग से बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। तब विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ अर्जुन ने उनके साथ अत्यन्त भीषण युद्ध आरम्भ कर दिया। 52-54॥
 
Arjuna destroyed Satyajit's horse, flag, bow, fists, both his side-guard and charioteer. Thus, after his bow was broken again and again and his horses were killed, Satyajit fled from the battlefield. Rajan! Seeing him turning away from the fight, Drupada, the king of Panchala, started showering arrows with great speed on Pandu Nandan Arjuna. Then Arjuna, the best among victorious warriors, started a very heavy battle with them. 52-54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)