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mahabharat 1.137.50: तब सत्यजित ने दूसरा शक्तिशाली धनुष उठाया और तुरन्त ही अर्जुन को उसके घोड़े, सारथि और रथसहित घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  1.137.50 
अथान्यद् धनुरादाय सत्यजिद् वेगवत्तरम्।
साश्वं ससूतं सरथं पार्थं विव्याध सत्वर:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
तब सत्यजित ने दूसरा शक्तिशाली धनुष उठाया और तुरन्त ही अर्जुन को उसके घोड़े, सारथि और रथसहित घायल कर दिया।
 
Then Satyajit took another very powerful bow and instantly pierced Arjuna along with his horse, charioteer and chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)