Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.137.45-46: वीर सत्यजित् ने देखा कि कुन्तीपुत्र धनंजय पांचालराज को पकड़ने के लिए निकट आ रहा है, अतः वह उसकी रक्षा के लिए अर्जुन पर चढ़ गया; तदनन्तर इन्द्र और बालिकी के समान अर्जुन और पांचाल सत्यजित् युद्ध के लिए आमने-सामने आ गए और समस्त सेनाओं में खलबली मचा दी ॥45-46॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  1.137.45-46 
दृष्ट्वा पार्थं तदाऽऽयान्तं सत्यजित् सत्यविक्रम:।
पाञ्चालं वै परिप्रेप्सुर्धनंजयमुपाद्रवत्॥ ४५॥
ततस्त्वर्जुनपाञ्चालौ युद्धाय समुपागतौ।
व्यक्षोभयेतां तौ सैन्यमिन्द्रवैरोचनाविव॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वीर सत्यजित् ने देखा कि कुन्तीपुत्र धनंजय पांचालराज को पकड़ने के लिए निकट आ रहा है, अतः वह उसकी रक्षा के लिए अर्जुन पर चढ़ गया; तदनन्तर इन्द्र और बालिकी के समान अर्जुन और पांचाल सत्यजित् युद्ध के लिए आमने-सामने आ गए और समस्त सेनाओं में खलबली मचा दी ॥45-46॥
 
The brave Satyajit saw that Kunti's son Dhananjay was moving closer to capture the king of Panchala, so he climbed on Arjuna to protect him; Then, like Indra and Baliki, Arjun and Panchal Satyajit came face to face for the war and put all the armies into disarray. 45-46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)