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mahabharat 1.137.41: यशस्वी अर्जुन बड़ी फुर्ती से बाण चलाते थे और निरन्तर नये बाण चलाते रहते थे। धनुष पर बाण चढ़ाने और फिर छोड़ने में किंचितमात्र भी अन्तर नहीं होता था॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.137.41 
शीघ्रमभ्यस्यतो बाणान् संदधानस्य चानिशम्।
नान्तरं ददृशे किंचित् कौन्तेयस्य यशस्विन:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
यशस्वी अर्जुन बड़ी फुर्ती से बाण चलाते थे और निरन्तर नये बाण चलाते रहते थे। धनुष पर बाण चढ़ाने और फिर छोड़ने में किंचितमात्र भी अन्तर नहीं होता था॥ 41॥
 
The famous Arjuna shot arrows with great agility and was constantly aiming new arrows. There was not even the slightest difference in placing an arrow on his bow and then releasing it.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)