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mahabharat 1.137.4: फिर 'बहुत अच्छा' कहकर वे सभी राजकुमार (युद्ध के लिए तत्पर) जो आक्रमण करने के लिए तत्पर थे, अपने रथों पर बैठकर आचार्य द्रोण के साथ गुरुदक्षिणा देने के लिए वहाँ से चले॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.137.4 
तथेत्युक्त्वा तु ते सर्वे रथैस्तूर्णं प्रहारिण:।
आचार्यधनदानार्थं द्रोणेन सहिता ययु:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
फिर 'बहुत अच्छा' कहकर वे सभी राजकुमार (युद्ध के लिए तत्पर) जो आक्रमण करने के लिए तत्पर थे, अपने रथों पर बैठकर आचार्य द्रोण के साथ गुरुदक्षिणा देने के लिए वहाँ से चले॥4॥
 
Then saying 'very good', all those princes (ready for war) who were quick to attack, sat in their chariots and proceeded from there along with Acharya Drona to pay the Gurudakshina. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)