Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.137.35-37h: वैशम्पायन कहते हैं - हे राजन! उस समय पाण्डवपुत्र अर्जुन ने द्रोणाचार्य को प्रसन्न करने के लिए द्रुपद पर बाणों की वर्षा करते हुए आक्रमण किया। वह प्रलयकाल की अग्नि के समान प्रज्वलित होकर युद्धस्थल में सब ओर से घोड़ों, रथों और हाथियों के समूहों को नष्ट कर रहा था। | mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - हे राजन! उस समय पाण्डवपुत्र अर्जुन ने द्रोणाचार्य को प्रसन्न करने के लिए द्रुपद पर बाणों की वर्षा करते हुए आक्रमण किया। वह प्रलयकाल की अग्नि के समान प्रज्वलित होकर युद्धस्थल में सब ओर से घोड़ों, रथों और हाथियों के समूहों को नष्ट कर रहा था।
Vaishampayana says - O King! At that time, Arjuna, the son of Pandava, determined to please Dronacharya, attacked Drupada, showering a shower of arrows on him. He was blazing like the fire of the time of doomsday, destroying horses, chariots and herds of elephants from all sides in the battlefield. 35-36 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥