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mahabharat 1.137.3: ‘शिष्यों! युद्ध में पांचाल नरेश द्रुपद को पकड़कर मेरे पास ले आओ। तुम्हारा कल्याण हो। यही मेरे लिए सर्वोत्तम गुरु दक्षिणा होगी।’॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.137.3 
पञ्चालराजं द्रुपदं गृहीत्वा रणमूर्धनि।
पर्यानयत भद्र्रं व: सा स्यात् परमदक्षिणा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
‘शिष्यों! युद्ध में पांचाल नरेश द्रुपद को पकड़कर मेरे पास ले आओ। तुम्हारा कल्याण हो। यही मेरे लिए सर्वोत्तम गुरु दक्षिणा होगी।’॥3॥
 
‘Disciples! Capture Panchal King Drupada in the war and bring him to me. May you be blessed. This will be the best Guru Dakshina for me.’॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)