Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.137.24-26: उस समय नगर के सभी नागरिक, बालकों से लेकर वृद्धों तक, कौरवों से युद्ध कर रहे थे। जनमेजय! गुप्तचरों से यह सुनकर कि वहाँ घोर युद्ध हो रहा है, कौरव लगभग नगण्य हो गए हैं, पांचाल नरेश द्रुपद के बाणों से कर्ण का सारा शरीर घायल हो गया है, वह भयभीत होकर रथ से कूदकर भाग गया और कौरव सैनिक चीखते और कराहते हुए हम पाण्डवों की ओर दौड़ रहे हैं; पीड़ित सैनिकों का रोमांचकारी क्रन्दन सुनकर पाण्डवों ने आचार्य द्रोण को प्रणाम किया, अपने रथों पर बैठ गए और शीघ्रतापूर्वक वहाँ से चले गए। अर्जुन ने पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर को यह कहकर रोक दिया कि 'तुम्हें युद्ध नहीं करना चाहिए'॥ 24-26॥ | mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय नगर के सभी नागरिक, बालकों से लेकर वृद्धों तक, कौरवों से युद्ध कर रहे थे। जनमेजय! गुप्तचरों से यह सुनकर कि वहाँ घोर युद्ध हो रहा है, कौरव लगभग नगण्य हो गए हैं, पांचाल नरेश द्रुपद के बाणों से कर्ण का सारा शरीर घायल हो गया है, वह भयभीत होकर रथ से कूदकर भाग गया और कौरव सैनिक चीखते और कराहते हुए हम पाण्डवों की ओर दौड़ रहे हैं; पीड़ित सैनिकों का रोमांचकारी क्रन्दन सुनकर पाण्डवों ने आचार्य द्रोण को प्रणाम किया, अपने रथों पर बैठ गए और शीघ्रतापूर्वक वहाँ से चले गए। अर्जुन ने पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर को यह कहकर रोक दिया कि 'तुम्हें युद्ध नहीं करना चाहिए'॥ 24-26॥
At that time all the citizens of the city, from children to old people, were fighting the Kauravas. Janamejaya! On hearing from the spies that a fierce battle was going on there, the Kauravas were almost non-existent, Karna's entire body was wounded by the arrows of Panchal king Drupada, he jumped from the chariot in fear and ran away and the Kaurava soldiers were running towards us Pandavas, screaming and groaning; on hearing the thrilling cry of the afflicted soldiers, the Pandavas bowed to Acharya Drona, sat on their chariots and quickly left from there. Arjuna stopped Pandava's son Yudhishthira by saying, 'You should not fight'.॥ 24-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥