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mahabharat 1.137.2: जनमेजय! तत्पश्चात आचार्य ने अपने शिष्यों को बुलाकर उनसे इस प्रकार गुरुदक्षिणा माँगी -॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.137.2 
तत: शिष्यान् समानीय आचार्योऽर्थमचोदयत्।
द्रोण: सर्वानशेषेण दक्षिणार्थं महीपते॥ २॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! तत्पश्चात आचार्य ने अपने शिष्यों को बुलाकर उनसे इस प्रकार गुरुदक्षिणा माँगी -॥2॥
 
Janamejaya! Thereafter the Acharya called his disciples and asked them for Gurudakshina as follows -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)