Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.137.19-22: उस समय दुर्योधन, विकर्ण, सुबाहु, दीर्घलोचन और दु:शासन बड़े क्रोध में भरकर बाणों की वर्षा करने लगे। भारत! युद्ध में कभी पराजित न होने वाले महाधनुर्धर द्रुपद अत्यन्त घायल होकर तत्काल उनकी समस्त सेनाओं को महान् कष्ट देने लगे। वे अग्निचक्र के समान सम्पूर्ण दिशाओं में घूमते हुए दुर्योधन, विकर्ण, महाबली कर्ण, अनेक वीर राजकुमारों और उनकी विविध सेनाओं को बाणों से तृप्त करने लगे।॥19-22॥ | mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय दुर्योधन, विकर्ण, सुबाहु, दीर्घलोचन और दु:शासन बड़े क्रोध में भरकर बाणों की वर्षा करने लगे। भारत! युद्ध में कभी पराजित न होने वाले महाधनुर्धर द्रुपद अत्यन्त घायल होकर तत्काल उनकी समस्त सेनाओं को महान् कष्ट देने लगे। वे अग्निचक्र के समान सम्पूर्ण दिशाओं में घूमते हुए दुर्योधन, विकर्ण, महाबली कर्ण, अनेक वीर राजकुमारों और उनकी विविध सेनाओं को बाणों से तृप्त करने लगे।॥19-22॥
At that time, Duryodhana, Vikarna, Subahu, Dirghlochana and Dushasan were filled with great anger and started showering arrows. Bhaarat! The great archer Drupada, who was never defeated in war, being severely wounded, immediately inflicted great suffering on all their armies. He moved in all directions like a wheel of fire and started satiating Duryodhana, Vikarna, the mighty Karna, many valiant princes and their various armies with arrows.॥19-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥