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mahabharat 1.137.15-16: कौरवों को देखते ही राजा द्रुपद ने उन पर चारों ओर से आक्रमण कर दिया और बाणों का विशाल जाल बिछाकर कौरव सेना को स्तब्ध कर दिया। यद्यपि युद्ध में फुर्ती दिखाने वाले राजा द्रुपद रथ पर बैठकर अकेले ही बाणों की वर्षा कर रहे थे, तथापि अत्यन्त भयभीत होकर कौरव उन्हें भी बहुतों में से एक मानने लगे॥15-16॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  1.137.15-16 
द्रुपद: कौरवान् दृष्ट्वा प्राधावत समन्तत:।
शरजालेन महता मोहयन् कौरवीं चमूम्॥ १५॥
तमुद्यतं रथेनैकमाशुकारिणमाहवे।
अनेकमिव संत्रासान्मेनिरे तत्र कौरवा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कौरवों को देखते ही राजा द्रुपद ने उन पर चारों ओर से आक्रमण कर दिया और बाणों का विशाल जाल बिछाकर कौरव सेना को स्तब्ध कर दिया। यद्यपि युद्ध में फुर्ती दिखाने वाले राजा द्रुपद रथ पर बैठकर अकेले ही बाणों की वर्षा कर रहे थे, तथापि अत्यन्त भयभीत होकर कौरव उन्हें भी बहुतों में से एक मानने लगे॥15-16॥
 
On seeing the Kauravas, King Drupada attacked them from all sides and laid a huge net of arrows and stunned the Kaurava army. Though King Drupada, who showed agility in battle, was sitting on a chariot and showering arrows all by himself, yet due to extreme fear the Kauravas started treating him as one of many.॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)