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mahabharat 1.137.12: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! कौरवों आदि राजकुमारों को अपने बल और पराक्रम पर बड़ा गर्व था; इसलिए अर्जुन ने उचित परामर्श करके महाब्राह्मण द्रोणाचार्य से कहा -॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 137: द्रोणका शिष्योंद्वारा द्रुपदपर आक्रमण करवाना, अर्जुनका द्रुपदको बंदी बनाकर लाना और द्रोणद्वारा द्रुपदको आधा राज्य देकर मुक्त कर देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.137.12 
वैशम्पायन उवाच
पूर्वमेव तु सम्मन्त्र्य पार्थो द्रोणमथाब्रवीत्।
दर्पोद्रेकात् कुमाराणामाचार्यं द्विजसत्तमम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! कौरवों आदि राजकुमारों को अपने बल और पराक्रम पर बड़ा गर्व था; इसलिए अर्जुन ने उचित परामर्श करके महाब्राह्मण द्रोणाचार्य से कहा -॥12॥
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! The Kauravas and other princes were very proud of their strength and valour; therefore, after proper consultation, Arjuna said to the great Brahmin Dronacharya -॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)