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mahabharat 1.136.d1-17: 'सूत जाति का मनुष्य सूर्य के समान तेजस्वी, क्षत्रिय गुणों से युक्त और युद्धभूमि की शोभा बढ़ाने वाला योद्धा कैसे उत्पन्न कर सकता है? अपनी भुजाओं के बल और मेरे जैसे आज्ञाकारी मित्र की सहायता से राजा कर्ण न केवल अंग देश का, अपितु सम्पूर्ण पृथ्वी का उत्तराधिकारी बनने का अधिकारी है।॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 1.136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान  »  श्लोक d1-17
 
 
श्लोक  1.136.d1-17 
(कथमादित्यसंकाशं सूतोऽमुं जनयिष्यति।
एवं क्षत्रगुणैर्युक्तं शूरं समितिशोभनम्॥ )
पृथिवीराज्यमर्होऽयं नाङ्गराज्यं नरेश्वर:।
अनेन बाहुवीर्येण मया चाज्ञानुवर्तिना॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'सूत जाति का मनुष्य सूर्य के समान तेजस्वी, क्षत्रिय गुणों से युक्त और युद्धभूमि की शोभा बढ़ाने वाला योद्धा कैसे उत्पन्न कर सकता है? अपनी भुजाओं के बल और मेरे जैसे आज्ञाकारी मित्र की सहायता से राजा कर्ण न केवल अंग देश का, अपितु सम्पूर्ण पृथ्वी का उत्तराधिकारी बनने का अधिकारी है।॥ 17॥
 
'How can a person belonging to the Suta caste produce such a radiant warrior like the Sun, who is endowed with such Kshatriya qualities and adorns the battlefield? With this strength of his arms and the help of an obedient friend like me, King Karna deserves to inherit not only the kingdom of Anga but the entire earth.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)