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mahabharat 1.136.7: 'नराधम! जैसे यज्ञ में अग्नि के पास बैठे हुए पुरोहित को कुत्ता नहीं पा सकता, उसी प्रकार तुम भी अंगदेश का राज्य भोगने के योग्य नहीं हो। 7॥   |   mahabharat अध्याय 1.136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 136: भीमसेनके द्वारा कर्णका तिरस्कार और दुर्योधनद्वारा उसका सम्मान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.136.7 
अङ्गराज्यं च नार्हस्त्वमुपभोक्तुं नराधम।
श्वा हुताशसमीपस्थं पुरोडाशमिवाध्वरे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'नराधम! जैसे यज्ञ में अग्नि के पास बैठे हुए पुरोहित को कुत्ता नहीं पा सकता, उसी प्रकार तुम भी अंगदेश का राज्य भोगने के योग्य नहीं हो। 7॥
 
'Naradham! Just as a dog cannot find the priest kept near the fire in a yagya, in the same way you too are not worthy of enjoying the kingdom of Angadesha. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)